आभा अनिस
प्रेस नोट
“ढोंगी ‘बाबाओं’ को मिल रहा राजनीतिक संरक्षण बंद करो; ‘वाघमारे बाबा’ और ‘कैप्टन अशोक खरात’ जैसे मामले दोबारा हुए तो जिम्मेदार कौन?”
नागपुर : 1990 के दशक में पुणे क्षेत्र में उजागर हुए तथाकथित “वाघमारे बाबा” प्रकरण ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया था। भैरवी पूजा के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करने वाले इस ढोंगी को अदालत ने 20 वर्ष की सजा सुनाई थी।
आज भी राज्य में “कैप्टन अशोक खरात बाबा” जैसे कई तथाकथित “बाबा”, “तांत्रिक” और “गुरु” खुलेआम सक्रिय हैं। यह महज संयोग नहीं, बल्कि उन्हें मिल रहे राजनीतिक संरक्षण का परिणाम है—ऐसा गंभीर आरोप सामने आ रहा है।
धर्म के नाम पर चल रही इस आपराधिक गतिविधि की ओर कई बार स्थानीय राजनेता, सत्ताधारी तत्व और प्रशासन जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं। कारण साफ है—ऐसे ढोंगी बाबाओं के माध्यम से जनता पर प्रभाव बनाए रखने का खेल चलता रहता है। इसका परिणाम यह होता है कि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी होती है या कई मामले दबा दिए जाते हैं।
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने राज्य सरकार से सीधे सवाल किए हैं :
ऐसे ढोंगी बाबाओं को किसका राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
पुलिस तंत्र कार्रवाई करने में टालमटोल क्यों करता है?
जादूटोना विरोधी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन केवल कागजों तक ही सीमित क्यों है?
यह स्पष्ट है कि अंधविश्वास अब केवल सामाजिक समस्या नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रही एक संगठित आपराधिक व्यवस्था बन चुका है। “कैप्टन खरात बाबा” प्रकरण के बाद भी यदि सरकार नहीं जागी, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
समिति ने अब तक अनेक ढोंगी बाबाओं को बेनकाब किया है, उन्हें चुनौती देकर उनका असली चेहरा उजागर किया है, कई को जेल तक पहुंचाया है और पीड़ितों को न्याय दिलाया है।
समिति की प्रमुख मांगें :
सभी ऐसे मामलों की जांच विशेष जांच दल (SIT) के माध्यम से की जाए।
ढोंगी बाबाओं से जुड़े राजनीतिक व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
जादूटोना विरोधी कानून के तहत मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालतों में हो।
ऐसे बाबाओं को सार्वजनिक मंचों पर समर्थन देने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाए।
यदि आज सरकार और प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो भविष्य में होने वाले हर “कैप्टन खरात बाबा” जैसे मामले की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी सीधे सत्ताधारियों पर होगी।
— हरीश देशमुख
राष्ट्रीय महासचिव,
अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति
(प्रेस विज्ञप्ति)